स्क्रीन टाइम ज़्यादा, नींद कम? डिजिटल लाइफस्टाइल से बिगड़ती हेल्थ को कैसे संभालें
मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी – दिन का कितना हिस्सा इन स्क्रीन पर निकल जाता है, शायद आपको खुद भी सही से अंदाज़ा नहीं हो। दिक्कत तब बढ़ती है जब स्क्रीन टाइम बढ़ता जाता है और नींद कम होती जाती है। नतीजा – थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, वज़न बढ़ना, आँखों का दर्द, और लंबे समय में सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स।
इस आर्टिकल में हम समझेंगे:
- ज़्यादा स्क्रीन टाइम और कम नींद आपके दिमाग और बॉडी पर क्या असर डालते हैं
- कौन-सी छोटी-छोटी आदतें आपकी हेल्थ को धीरे-धीरे खराब कर रही हैं
- प्रैक्टिकल तरीके जिनसे आप बिना फोन छोड़े भी अपनी हेल्थ को काफी हद तक संभाल सकते हैं
अगर आपको योग, फिटनेस और न्यूट्रिशन से जुड़े ऐसे ही आसान और प्रैक्टिकल आर्टिकल्स पसंद हैं, तो आप FITHIT Health & Fitness Blog पर और भी डीटेल्ड गाइड्स पढ़ सकते हैं।
क्यों ज़्यादा स्क्रीन टाइम और कम नींद इतना बड़ा मुद्दा है?
शायद आप सोचें – "सब ही तो फोन यूज़ कर रहे हैं, मेरा क्या होगा?" लेकिन रिसर्च साफ़ दिखाती है कि लंबे समय तक स्क्रीन पर रहना और नींद की कमी मिलकर आपकी हेल्थ पर डबल अटैक करते हैं:
- ब्लू लाइट और नींद का कनेक्शनस्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आपके दिमाग को ये मैसेज देती है कि अभी दिन है, सोने का टाइम नहीं। इससे मेलाटोनिन (sleep hormone) कम बनता है और नींद आने में देर होती है।
- ब्रेन ओवरस्टिम्युलेशनरील्स, नोटिफिकेशन, गेम्स, चैट – दिमाग लगातार एक्टिव रहता है। जब सोने का टाइम आता है, तब भी दिमाग "ऑफ" नहीं हो पाता।
- नींद की क्वालिटी गिर जाती हैभले ही आप 7–8 घंटे बिस्तर पर हों, लेकिन अगर सोने से ठीक पहले तक फोन पर थे, तो डीप स्लीप कम होती है। इसका असर अगले दिन की एनर्जी, मूड और फोकस पर साफ दिखता है।
- लॉन्ग-टर्म हेल्थ रिस्कलगातार नींद की कमी से:
- वज़न बढ़ने का रिस्क
- डायबिटीज़ और हाई BP का रिस्क
- डिप्रेशन और एंग्ज़ाइटी की प्रॉब्लम
- इम्युनिटी कम होना
यानी ये सिर्फ "थोड़ी थकान" या "हल्की सी नींद" वाला मामला नहीं है, बल्कि ओवरऑल हेल्थ और लाइफस्टाइल का सवाल है।
खुद से ईमानदार सवाल: आपका स्क्रीन टाइम कितना है?
सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि आपकी रियल स्क्रीन हैबिट क्या है। अक्सर हम खुद ही underestimate कर देते हैं।
एक दिन खुद से ये सवाल पूछें:
- सुबह उठते ही सबसे पहले क्या देखते हैं – फोन या सूरज?
- खाने के साथ हमेशा मोबाइल, यूट्यूब या सीरीज़ ऑन रहती है?
- वॉशरूम तक में फोन साथ जाता है?
- रात को "बस 10 मिनट" स्क्रॉल करते-करते 1–1.5 घंटा निकल जाता है?
- वीकेंड पर स्क्रीन टाइम और भी ज़्यादा हो जाता है?
अगर इन में से ज़्यादातर के जवाब "हाँ" हैं, तो आपको अपनी डिजिटल हैबिट्स पर काम शुरू करना चाहिए।
टिप: अपने फोन की Screen Time / Digital Wellbeing रिपोर्ट देखिए। हफ्ते का एवरेज स्क्रीन टाइम देख कर अक्सर लोग खुद ही चौंक जाते हैं।

कौन-सी आदतें आपकी नींद और हेल्थ को चुपचाप खराब कर रही हैं?
नींद खराब सिर्फ फोन होने से नहीं, बल्कि फोन यूज़ करने के तरीके से होती है। ये कुछ कॉमन मिसटेक्स हैं:
1. "बस 5 मिनट" वाला झूठ
सोने से पहले आप सोचते हैं – "बस 5 मिनट रील्स देखता हूँ" या "एक वीडियो और"… और पता ही नहीं चलता 30–45 मिनट निकल गए। ये extra टाइम सीधे आपकी नींद से कटता है।
2. बेड = चार्जिंग स्टेशन
बहुत से लोग:
- बेड पर लेटकर फोन चलाते हैं
- तकिए के पास फोन रखकर सोते हैं
इससे दिक्कतें:
- सोने से पहले दिमाग ज़्यादा एक्टिव रहता है
- रात में बार-बार स्क्रीन चेक करने का मन करता है
- रात को नोटिफिकेशन की वज़ह से नींद टूटती है
3. हर नोटिफिकेशन पर तुरंत रिएक्ट करना
हर "टिंग" या वाइब्रेशन पर आपका ध्यान भटकता है। ये ब्रेन को लगातार alert मोड में रखता है, जिससे रिलैक्स होना मुश्किल हो जाता है।
4. देर रात तक वर्क या स्टडी स्क्रीन पर
वर्क फ्रॉम होम या ऑनलाइन स्टडी की वज़ह से बहुत लोग लेट नाइट लैपटॉप पर काम करते हैं।
- दिमाग ओवरलोड हो जाता है
- स्क्रीन और स्ट्रेस दोनों मिलकर नींद की क्वालिटी गिरा देते हैं
5. स्क्रीन के साथ खाना
खाना खाते समय अगर हमेशा फोन या टीवी ऑन हो:
- आप ज़्यादा खा लेते हैं (mindless eating)
- डाइजेशन पर असर पड़ता है
- ब्रेन को "दिन अभी खत्म नहीं हुआ" वाला सिग्नल मिलता है
हेल्थ को पटरी पर लाने का पहला स्टेप: डिजिटल रूटीन बनाना
आपको फोन छोड़ने की ज़रूरत नहीं, बस रूटीन और लिमिट सेट करनी है।
1. "स्क्रीन कर्फ्यू" सेट कीजिए
सोने से कम से कम 60 मिनट पहले स्क्रीन बंद करने की आदत डालें। अगर 60 मिनट मुश्किल लगे, तो 20–30 मिनट से शुरुआत करें।
आप ये कर सकते हैं:
- रात का एक टाइम फिक्स करें – जैसे 10:30 बजे के बाद कोई स्क्रीन नहीं
- उस टाइम के बाद:
- सिर्फ हल्की म्यूज़िक (ऑडियो)
- बुक पढ़ना
- हल्का स्ट्रेच या योग
2. बेडरूम को "नो-फोन ज़ोन" बनाएं
- बेड पर फोन लेकर मत जाएं
- फोन चार्जिंग के लिए रूम के दूसरे कोने या दूसरे कमरे में रखें
- अलार्म के लिए डिजिटल या एनालॉग क्लॉक यूज़ करें, फोन नहीं
शुरुआत में अजीब लगेगा, लेकिन कुछ ही दिनों में आप नोटिस करेंगे कि नींद जल्दी और गहरी आने लगी है।
3. नोटिफिकेशन डाइट
जैसे हम जंक फूड कम करते हैं, वैसे ही जंक नोटिफिकेशन भी कम करने पड़ेंगे:
- सोशल मीडिया, गेम्स, शॉपिंग ऐप्स की push notifications ऑफ कर दें
- सिर्फ ज़रूरी – कॉल, मैसेज, काम से जुड़े ऐप्स – की नोटिफिकेशन ऑन रखें
- रात 9–10 बजे के बाद Do Not Disturb मोड ऑन करें
4. टाइम-ब्लॉकिंग: कब कौन-सी स्क्रीन?
दिन में स्क्रीन टाइम को ऐसे बाँटें:
- सुबह: सिर्फ ज़रूरी मैसेज / मेल चेक (15–20 मिनट)
- दोपहर / शाम: काम या स्टडी के लिए फोकस्ड स्क्रीन टाइम
- रात: एंटरटेनमेंट स्क्रीन टाइम, लेकिन सोने से 1–1.5 घंटे पहले तक ही
अगर आप चाहें तो फोन में मौजूद फोकस मोड या वर्क मोड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ऐसे ही प्रैक्टिकल टाइम-मैनेजमेंट और हेल्थ टिप्स आप FITHIT Health & Fitness Blog पर भी पढ़ सकते हैं, जहाँ वर्कआउट, योग और न्यूट्रिशन को लाइफस्टाइल के साथ बैलेंस करने पर ज़ोर दिया जाता है।

नींद सुधारने के लिए आसान नाइट रूटीन
अब बात करते हैं कुछ कंक्रीट स्टेप्स की, जिन्हें आप आज से ही शुरू कर सकते हैं।
1. सोने का फिक्स टाइम
हर दिन – वीकेंड सहित – कोशिश करें कि:
- लगभग एक ही टाइम पर सोएं
- और एक ही टाइम पर उठें
इससे आपका बॉडी क्लॉक सेट हो जाता है और नींद अपने आप बेहतर होने लगती है।
2. हल्का योग या स्ट्रेचिंग
सोने से 20–30 मिनट पहले ये 5–10 मिनट के योग आसन बहुत मदद करते हैं:
- बालासन (Child’s Pose) – दिमाग शांत करने के लिए
- पश्चिमोत्तानासन (Seated Forward Bend) – बैक और हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच के लिए
- सुप्त बद्ध कोणासन (Reclining Bound Angle Pose) – रिलैक्सेशन के लिए
- विपरीत करनी (Legs up the Wall Pose) – पैरों की थकान और ब्लड सर्कुलेशन के लिए
इन आसनों के बारे में डीटेल में पढ़ने और सही तरीके से करने के लिए आप योग पर लिखे आर्टिकल्स FITHIT Health & Fitness Blog पर देख सकते हैं।
3. स्क्रीन की जगह बुक या जर्नल
- 10–15 मिनट बुक पढ़ें (पेपरबैक, न कि Kindle/फोन)
- या एक जर्नल में दिन भर की 3 अच्छी चीज़ें लिखें
इससे दिमाग पॉज़िटिव मोड में जाता है और स्ट्रेस कम महसूस होता है।
4. लाइट और टेम्परेचर का ध्यान रखें
- कमरे की लाइट डिम रखें, तेज़ सफेद रोशनी से बचें
- अगर हो सके तो पीली/वार्म लाइट यूज़ करें
- कमरे का तापमान न बहुत गर्म हो, न बहुत ठंडा – मिडिल में रखें
5. कैफीन और हेवी मील से दूरी
- शाम 5–6 बजे के बाद चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक कम लें
- सोने से ठीक पहले भारी, तला-भुना खाना न खाएँ
- अगर हल्की भूख हो तो:
- गुनगुना दूध
- मुट्ठी भर मेवे
- या हल्का फल
स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट के लिए कुछ स्मार्ट टूल्स और ट्रिक्स
आप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ही अपने स्क्रीन टाइम को बेहतर कंट्रोल कर सकते हैं:
1. स्क्रीन टाइम ट्रैक करने वाले ऐप्स
- Android में: Digital Wellbeing
- iOS में: Screen Time
इनसे आप देख सकते हैं:
- रोज़ाना कितने घंटे फोन यूज़ हुआ
- कौन-सी ऐप्स सबसे ज़्यादा टाइम खा रही हैं
2. ऐप लिमिट्स सेट करें
- सोशल मीडिया ऐप्स के लिए डेली लिमिट लगा दें – जैसे 30–45 मिनट
- लिमिट पूरी होते ही ऐप खुद ब्लॉक हो जाए (आप चाहें तो ओवरराइड कर सकते हैं, लेकिन कम से कम एक रिमाइंडर तो मिलेगा)
3. होम स्क्रीन साफ़ रखें
- होम स्क्रीन पर सिर्फ ज़रूरी ऐप्स रखें
- सोशल मीडिया, गेम्स, वीडियो ऐप्स को दूसरे पेज या फोल्डर में रखिए
इससे हर बार फोन खोलते ही वही ऐप्स सामने नहीं दिखेंगी, और ऑटो-पायलट में खुलने की आदत कम होगी।
4. "सिंगल टास्क" रूल
एक समय पर एक ही स्क्रीन एक्टिविटी करें:
- या तो काम
- या एंटरटेनमेंट
- या चैट
काम करते समय बीच-बीच में रील्स, चैट, न्यूज़ सब मिलाकर दिमाग पर ज़्यादा लोड पड़ता है और थकान जल्दी होती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर – सिर्फ थकान की बात नहीं
ज़्यादा स्क्रीन टाइम और कम नींद का असर सिर्फ बॉडी पर नहीं, माइंड पर भी गहरा होता है:
- मूड स्विंग्स – छोटी बातों पर गुस्सा या उदासी
- फोकस की कमी – पढ़ाई या काम में मन न लगना
- ओवरकम्पेरिज़न – सोशल मीडिया पर दूसरों की लाइफ देखकर खुद को कमतर समझना
- ब्रेन फॉग – दिमाग भारी-भारी सा महसूस होना
अगर आप नोटिस कर रहे हैं कि:
- नींद कम हो रही है
- स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है
- और साथ में मूड, फोकस, मोटिवेशन भी गिर रहे हैं
तो ये सीरियस सिग्नल है कि आपको अपनी डिजिटल और स्लीप हैबिट्स पर तुरंत काम करना चाहिए।
छोटा-सा 7-दिन चैलेंज: अभी से शुरू करें
आपके लिए एक सिंपल सा 7-दिन का चैलेंज:
- अपने फोन की Screen Time रिपोर्ट देखें और कहीं लिख लें।
- अगले 7 दिन:
- सोने से 30–60 मिनट पहले स्क्रीन बंद
- बेड पर फोन नहीं
- रात को Do Not Disturb मोड ऑन
- दिन में सोशल मीडिया के लिए कुल 30–45 मिनट लिमिट
- हर सुबह उठकर नोट करें:
- नींद कैसी रही? (1 से 5 में रेटिंग)
- सुबह की एनर्जी कैसी है?
7 दिन बाद पुरानी Screen Time रिपोर्ट और अपनी रेटिंग्स को compare कीजिए। ज़्यादातर लोग खुद महसूस करते हैं कि थोड़ा सा कंट्रोल भी बड़ा फर्क ला सकता है।
सार: टेक्नोलॉजी नहीं, आदतें बदलनी हैं
- स्क्रीन खुद बुरी नहीं है, बिना लिमिट और बिना रूटीन के स्क्रीन यूज़ करना दिक्कत है।
- ज़्यादा स्क्रीन टाइम + कम नींद = थकान, चिड़चिड़ापन, वज़न बढ़ना, हार्मोनल इश्यूज़ और मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स।
- छोटे-छोटे कदम – जैसे स्क्रीन कर्फ्यू, बेडरूम में नो-फोन, नोटिफिकेशन डाइट, नाइट योग – आपकी नींद और ओवरऑल हेल्थ दोनों को बेहतर बना सकते हैं।
- टेक्नोलॉजी का स्मार्ट यूज़ करें – Screen Time, Focus Mode, ऐप लिमिट्स – ताकि फोन आपके कंट्रोल में रहे, आप फोन के नहीं।
अगर आप हेल्दी और बैलेंस्ड लाइफस्टाइल बनाना चाहते हैं, तो स्क्रीन, नींद, डाइट और मूवमेंट – चारों को साथ में देखना ज़रूरी है। इसी holistic अप्रोच पर FITHIT Health & Fitness Blog पर भी आर्टिकल्स लिखे जाते हैं, जहाँ योग, वर्कआउट और न्यूट्रिशन को प्रैक्टिकल तरीके से समझाया जाता है।
अब आपकी बारी – पहला कदम क्या होगा?
आपको सब कुछ एक ही दिन में बदलने की ज़रूरत नहीं। बस एक छोटा कदम चुनिए और आज से शुरू कीजिए:
- क्या आप आज से सोने से 30 मिनट पहले फोन बंद रख सकते हैं?
- या बेडरूम को नो-फोन ज़ोन बना सकते हैं?
- या सोशल मीडिया के लिए डेली लिमिट सेट कर सकते हैं?
कमेंट्स / नोट्स में अपने लिए एक छोटा-सा रूल लिखिए और अगले 7 दिन उसे फॉलो करने की कोशिश कीजिए।

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